प्रकृति से प्यार का अनोखा जश्न 

पाया लिंचो! यानी शुक्रिया, अरुणाचल प्रदेश के या​जाली गांव से लौटते वक्त एक यही शब्द था, जो हम सब की जुबां पर था। यहां हर साल फरवरी महीने में होने वाले  न्योकुम  फेस्टिवल को इस बार करीब से जानने का जो मौका मिला था। फसल की बुआई से पहले मनाए जाने वाले इस फेस्टिवल में सब कुछ… Continue reading प्रकृति से प्यार का अनोखा जश्न 

वो बर्फीले फूलों की बारिश

कुछ यादें दिल से कभी जुदा नहीं होतीं। न समय की धूल उन पर जमती है और न ही उम्र के बढ़ते पड़ाव में वह पीछे छूटती है। रूपकुंड की ऐसी ही सुनहरी यादें जेहन में हमेशा ताजा रहती हैं। जरा दिल के कोने में झांको और सफेद चादर में लिपटी पहाड़ियों और उनके बीचोंबीच… Continue reading वो बर्फीले फूलों की बारिश

मानस आज भी मन में भर रहा खुशियों के रंग

असम का जिक्र आते ही सबसे पहले अगर मन में जिस चीज का ख्याल आता है, वो है बिहू। मौसम के अलग—अलग स्वरूपों को सेलिब्रेट करने का इससे खूबसूरत तरीका शायद मेरी नजर में तो दूसरा नहीं हो सकता। हालांकि इसके बारे में मैंने सुना ही था, लेकिन पहली बार इसे देखने का सुखद अनुभव… Continue reading मानस आज भी मन में भर रहा खुशियों के रंग

यहां मौत भी अपनों को जुदा नहीं कर पाती 

  खोनमा। नगालैंड का एक छोटा सा गांव। 700 साल से भी ज्यादा पुराने इस गांव के इतिहास में यूं तो ढेरों सुनहरे पन्ने हैं। शौर्य और पराक्रम की कहानियां हैं। देश के पहले ग्रीन विलेज के रूप में गौरवशाली पहचान है। मगर एक चीज जिसने मुझे सबसे ज्यादा छुआ, वो है अपनों का साथ… Continue reading यहां मौत भी अपनों को जुदा नहीं कर पाती 

आपसी होड़ और आधुनिक चकाचौंध में खोता किला रायपुर

जब मैं किला रायपुर के उस स्टेडियम में पहुंचा, जहां ग्रामीण खेलों का आयोजन हो रहा था, थोड़ी निराशा हाथ लगी। देखने में किसी गांव के मेले से ज्यादा नहीं लग रहा था, दुनिया के मैप पर धूम मचाने वाला यह उत्सव।